विशेष पुलिस आयुक्त/आर्थिक अपराध शाखा का संदेश
सभी नागरिकों से अपील की जाती है कि वे सतर्क रहें और धोखाधड़ी वाली योजनाओं तथा अधूरी तैयार परियोजनाओं में निवेश करने से बचें, जो शीघ्र और सुनिश्चित लाभ का वादा करती हैं। ऐसे प्रस्ताव अक्सर वास्तविकता से परे होते हैं और अंततः आपकी मेहनत की कमाई के नुकसान का कारण बनते हैं।
ऐसे घोटाले न केवल व्यक्तियों की बचत को समाप्त कर देते हैं, बल्कि पीड़ितों को लंबी कानूनी लड़ाइयों में भी उलझा देते हैं। ऐसे कई मामलों में शिकायतकर्ता उपलब्ध दीवानी उपायों की अनदेखी करते हुए आपराधिक कार्यवाही का सहारा लेते हैं। दुर्भाग्यवश, इससे अक्सर लंबे समय तक कठिनाइयों, आर्थिक तनाव और वास्तविक न्याय न मिल पाने जैसी परिस्थितियाँ उत्पन्न होती हैं।
आर्थिक अपराध शाखा नागरिकों से जागरूक निवेशक बनने का आग्रह करती है। निवेश करने से पहले परियोजना या योजना की प्रामाणिकता की जाँच करें। नकद लेन-देन से बचें और हमेशा औपचारिक बैंकिंग माध्यमों का उपयोग करें। आर्थिक धोखाधड़ी के नए और बदलते तरीकों के प्रति सतर्क रहें तथा बड़ी वित्तीय प्रतिबद्धताएँ करने से पहले पेशेवर सलाह लें। समझदारी से निवेश करें, जागरूक रहें और आर्थिक अपराधों को रोकने में हमारी सहायता करें।
सुश्री गरिमा भटनागर, आईपीएस
विशेष पुलिस आयुक्त/आर्थिक अपराध शाखा
आर्थिक अपराध शाखा के बारे में
आर्थिक अपराध शाखा ने वर्ष 1994 से कुतुब इंस्टीट्यूशनल एरिया / पीटीएस मालवीय नगर से अपराध शाखा के एक भाग के रूप में कार्य करना शुरू किया। अत्यधिक संगठित अपराधियों द्वारा किए जाने वाले श्वेतपोश अपराधों में अचानक वृद्धि होने के कारण एक स्वतंत्र आर्थिक अपराध शाखा इकाई के गठन की आवश्यकता महसूस हुई। इन अपराधों के अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव भी थे। श्वेतपोश अपराधों को अंजाम देने में कुशल पेशेवरों, संगठित गिरोहों और उन्नत तकनीकों के उपयोग के कारण जाँचकर्ताओं में भी समान स्तर के कौशल और व्यावसायिक दक्षता की आवश्यकता थी। वर्ष 2014 में आर्थिक अपराध शाखा को अपराध शाखा से अलग करके एक स्वतंत्र विशेष इकाई के रूप में गठित किया गया।
वर्ष 2007 में आर्थिक अपराध शाखा के लिए एक अलग पुलिस थाना स्थापित किया गया और इसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के संपूर्ण क्षेत्राधिकार में अधिसूचित किया गया। वर्ष 2012 से आर्थिक अपराध शाखा ने आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक नए भवन में पुलिस थाना मंदिर मार्ग परिसर से कार्य करना शुरू किया।
आर्थिक अपराध शाखा पुलिस की एक विशेष इकाई है, जो बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी और भारी धनराशि से जुड़े व्यापक प्रभाव वाले आर्थिक अपराधों की जाँच करती है। आर्थिक अपराध शाखा वित्तीय और आर्थिक धोखाधड़ी, भूमि एवं भवन संबंधी घोटालों, मल्टीलेवल मार्केटिंग धोखाधड़ी, बैंक धोखाधड़ी, बौद्धिक संपदा अधिकारों तथा अन्य प्रकार के आर्थिक अपराधों से संबंधित मामलों की जाँच करती है। जाँच के दौरान भारतीय दंड संहिता (IPC) के जटिल मामलों तथा विभिन्न केंद्रीय अधिनियमों के अंतर्गत आने वाले अन्य अपराधों की पड़ताल की जाती है। जाँच में आमतौर पर बैंकों, केंद्र एवं राज्य सरकार के विभागों और निजी कंपनियों सहित विभिन्न एजेंसियों से बड़ी मात्रा में दस्तावेज़ एकत्र करना और उनकी जाँच करना शामिल होता है। आर्थिक अपराध शाखा विभिन्न सरकारी एवं अर्ध-सरकारी विभागों, वित्त, वाणिज्य और कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालयों, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), वित्तीय खुफिया इकाई (FIU), केंद्रीय आर्थिक खुफिया ब्यूरो (CEIB), भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) तथा अन्य नियामक संस्थाओं के साथ निकट समन्वय बनाए रखती है। आर्थिक अपराध शाखा कम से कम 3 करोड़ रुपये की राशि से जुड़े मामलों को अपने हाथ में लेती है।